अप्रमाद में ही आनंद की अनुभूति करे

सामावती और मागन्दीय की कथा

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समय बितता है | राजा एक अन्य स्त्री ‘मागन्दीय’ पर मोहित हो जाता है | वह एक ब्राह्मण की पुत्री है तथा बुद्ध से घृणा करती है | उसके पिता ने कुछ समय शाक्य-मुनि के सम्मुख प्रस्ताव रखा था कि वे मागन्दीय के साथ विवाह कर ले | तब तथागत ने उसे समझाया था, “मार की तीनो पुत्रिया तन्हा, सुरति तथा राग मिलकर भी मुझे आकर्षित नहीं कर सकी | उनके सामने तुम्हारी बेटी एक पात्र की तरह है जिसमे मल-मूत्र रख दिया गया है और उसे बाहर से रंग दिया है | अब मेरे मन में किसी प्रकार की कम इच्छा नहीं रह गई है |”
ऐसा सुनकर ब्राह्मण और उसकी पत्नी के अन्दर का प्रकाश जाग उठता है | दोनों प्रव्रज्या ग्रहण कर बुद्ध के शिष्य बन जाते हैं | अपनी पुत्री को उसके चाचा चुल्ल मागन्दीय को सौपकर दोनों बुद्ध संघ में शामिल हो जाते हैं | बाद में चाचा मागन्दीय उसे राजा उदयन को सौप देता है |
बुद्ध कौसाम्बी आते है | बहुत सारे लोग उनका प्रवचन सुनने आते हैं | उनमें सामावती की दासी खज्जूतरा भी होती है | वह स्त्रोतापन्न है | वह प्रतिदिन तथागत का प्रवचन सुनती है और फिर राजमहल में जाकर रानी को भी प्रवचन सुनाती है | अब वह धर्म प्रचारक की भूमिका निभाने लगी है | खज्जूतरा से धर्म प्रवचन सुनकर सामावती और उसकी दासियों की प्रबल इच्छा है कि वे बुद्ध को एक दिन राजमहल में आमंत्रित करे | बुद्ध वहा पधारें और उन्हें धर्म प्रवचन दे | सामावती राजा से इस हेतु आग्रह के लिए उचित अवसर की तलाश में है | इस बिच उसने महल में ही एक झरोखा बनवा लिया और उस झरोखे से वह और उसकी दासियाँ बुद्ध के दर्शन करने लगीं |
मागन्दीय ने राजा से इसकी शिकायत की | राजा बात की गहराई में गया और पाया कि मागन्दीय की शिकायत का कोई आधार नहीं था | अत: वह सामा से प्रसन्न हुआ और बुद्ध से आग्रह कर प्रतिदिन भंते आनन्द के आकर प्रवचन देने की व्यवस्था करा दी | वे रानी और दासियों को प्रतिदिन धर्म-प्रवचन देने लगे |
मागन्दीय अपने षड्यंत्र में विफल रही | अत: उसने एक और योजना बनाई | राजा को जब सामावती के महल में विश्राम के लिए जाना था तो वह भी साथ गई | राजा की बाँसुरी में एक साप छिपा दिया और उसे फुल से बंद कर दिया | राजा जब गहरी नींद में था तो उसने फुल हटा दिया और चिल्ला उठी, “साप ! साप !” राजा चौक कर उठ गया | उसे सामने साप दिखा | अब उसे मागन्दीय के कथन पर विश्वास हो गया कि सामावती ने उसे मारने की योजना बनाई थी | उसने सामा और उसकी दासियों एक पंक्ती में खड़ा कर दिया और मारने के उद्देश्य से उन पर तीर चला दिया | यद्यपि राजा एक बहुत ही धुरंधर तीरंदाज था, पर इस बार उसके तीर उन स्त्रियों पर कोई असर नहीं हुआ | उसका वार विफल हो गया |
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