अप्रमाद में ही आनदं की अनुभूति करे

सामवती और मागन्दीय की कथा

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कौसाम्बी के पास भद्रवती नाम का एक गाव था | भद्रवती में भद्रवतीय श्रेष्ठी नाम का श्रेष्ठी रहता था | एक बार वह नगर गंभीर प्लेग कि चपेट में आ गया | भद्रवतीय ने अपना नगर छोड़ा और अपनी पत्नी और पुत्री के साथ कौसाम्बी आ गया | उसकी बेटी का नाम श्याम (सामा ) था | वह बहुत ही बुद्धिमान थी |

कौसाम्बी में घोसित नाम का एक श्रेष्ठी रहता था | वह गरीबो के लिए एक भंडारा चलाता था | कौसाम्बी पहुचने के बाद भद्रवतीय की पुत्री वहा भोजन लेने गई | पहले दिन उसने तिन लोगो को भोजन लिया, दुसरे दिन दो लोगो का और तीसरे दिन सिर्फ एक आदमी का भोजन लिया | भंडारे के व्यवस्थापक ने यह देखकर उस लड़की के साथ व्यंग किया, ‘’आज जाकर तुमको अपने पेट की भूख की सही-सही जानकारी हुई हैं |’’
सामा उदास थी | उसने उत्तर दिया , ‘’भाई! ऐसी बात नहीं है | पहिले दिन माता-पिता जीवित थे अत: तीन थाली भोजन लिया , कल सिर्फ माँ जीवित थी अत: सिर्फ दो थाली ली | आज मै अकेली हू अत : मैंने सिर्फ एक भोजन लिया है |’’ व्यवथापक को सामा पर दया आ गई | अनाथ देखकर उसने सामा को अपने पास रख लिया |
सामा ने देखा कि भडारे में भीड़ का नियत्रण ठीक ढंग से नहीं हो पा रहा था | अत : उसने आने वालो कि पंक्ती अलग बनवा दी और जाने वालो की पंक्ती अलग | इससे पूरी कि पूरी की पूरी अव्यवस्था समाप्त हो गई | उसी समय भंडारे का मालिक घोषित श्रेष्ठी आया | उसने व्यवस्था देखी तो सामा से बहुत प्रभावित हुआ | उसने सामा को अपनी पुत्री के रूप में स्विकार कर लिया | चुकी सामा ने एक घेरा (वती) बनाया था अत: उसका नाम सामावती हो गया |
सामावती बहुत ही सुंदर और गुणवान थी | एक दिन राजा उदयन सवारी पर निकले और रास्ते में उनकी नजर सामावती पर पड़ी | सामावती को देखते ही वे उस पर अनुरक्त हो गए | अपने अनुचरों को सामावती के पिता घोषित श्रेष्ठी के पास यह कहने के लिए भेजा कि सामावती को राजमहल में भेज दिया जाए | घोषित श्रेष्ठी ने इसे सुना और उसे लगा कि उसकी प्रतिष्ठा पर आंच आने वाली है | अत: उसने सामावती को नहीं भेजा | राजा आग बबूला हो गया | उसने अपने सिपाहियों को श्रेष्ठी का सर्वस्व नाश करने के लिए भेज दिया | उन्होंने घर के बाहर ताला लगा दिया | तब सामावती ने अपने पिता से कहा कि वह राजमहल जायेंगी | घोषित ने मना किया पर सामवित ने अपने पिता को आश्वासन दिया कि वह उसकी प्रतिष्ठा पर जरा भी आंच नहीं आने देगी | अत: वह उसे राजमहल जाने दे | घोषित मान गया | वह राजमहल में पटरानी बनकर पहुँच गई |

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