कौन निर्वाण प्राप्त करेगा ?

सामावती और मागन्दीय की कथा

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मागन्दीय ने एक बार फिर षड्यंत्र रचा | उसने अपने चाचा चुल्ल मागन्दीय के साथ मिलकर उस महल में आग लगवा दी जिसमें सामा रहती थी | सामा और उसकी सभी दासियाँ आग में झुलसकर मर गई | राजा को सामा के मरने का बहुत दु:ख हुआ | उसे लग गया था कि मागन्दीय ने ही उसे मरवाया था | लेकिन इसकी सत्यता जानने के लिए उसने मागन्दीय से कहा, “जब तक सामा जीवित थी मुझे भय बना रहता था कि कभी न कभी मुझे मरवा देगी | अच्छा ही हुआ कि वह मर गई | निश्चय ही कोई है जो मुझसे बहुत प्रेम करता है उसी ने यह करवाया होंगा | मागन्दीय राजा की बातोँ बहुत खुश हुईं | उसने राजा को बता दिया कि उसने ही सारी योजना कार्यान्वित की थी | राजा ने ऐसा दिखाया मानों वह बहुत खुश हुआ हो | उसने मागन्दीय के सारे रिश्तोदारो को आमंत्रित किया की वह उनको पुरस्कार देना चाहता है | वे सभी आए | उनमें उसका चाचा भी था | उनके आने पर राजा ने सैनिकों को आदेश दिया, “सभी को गिरफ्तार कर लो और कमर तक जमीन में गाड़ दो |” सैनिकों ने राजा कि आज्ञा का पालन किया | रानी चिखती-चिल्लाती रही |उसे तथा उसकी सारी दसियों को जलाकर मार दिया गया |
भिक्षुओं ने रानी के अंत:पुर को जलते हुए देखा और बुद्ध को इस बारे में बताया | उन्होंने शास्ता से कि सामावती की क्या गति हुई | तब शाक्य मुनि ने उन्हें बताया. “जल जाने वाली उपासिकाओ में कुछ स्त्रोताप्न थी, कुछ सकृदागामी थी तथा कुछ अनागामी थी | उनकी मृत्यु बेकार नहीं गई है |” शास्ता ने शिष्यों को समझाया कि प्रमाद करना मरण का लक्षण है और अप्रमाद जीवन का |
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