पापी इस लोक में भी दु:ख पाता है, उस लोक में भी

पापी इस लोक में भी दु:ख पाता है, उस लोक में भी

चुन्द सुकरिक कि कथा

श्रावस्ती में चुन्द सुकरिक नामक एक कसाई पचपन वर्षो से सुअरों की हत्या क्र अपना जीवन यापन कर रहा था | जब उसके पास सूअर की कमी हो जाती तो वह धान के बदले सूअर के बच्चों को खरीद लेता था और अपने घर के पीछे एक बाड़े में रख देता था | वहीं उन्हें खाद्य सामग्री खिलाता था | तरह-तरह के वृक्षों के पत्ते या शरीर का मल खिलाकर उन्हें बड़ा करता था | जब किसी सूअर को मारना चाहता था तो उसे वधस्थान पर बांध देता था और उसके शरीर को बेंत से मार-मारकर फुला देता था | इस प्रकार उस सूअर के शरीर का मांस गाढ़ा और मोटा हो जाता था | तब बांस की एक नली से उसके पेट में गर्म जल डालता था | ऐसा करने से गर्म जल पेट में जाकर गुदा से बाहर नीलक जाता था | ऐसा बारबार करता था और इस प्रकार उस सूअर का पेट पूरी तरह साफ हो जाता था | इसके बाद वह गर्म जल डालकर उस सूअर के काले और कड़े बालों को नर्म क्र देता था | उसके बाद एक तेज तलवार लेकर उस सूअर का सर काट देता था | खून को एक बर्तन में इकट्ठा कर लेता था | उसके मांस में खून मिलाकर उसे भुनता था और फिर परिवार के साथ बैठकर खाता था | बचे हुए मांस को वह बाजार में बेच देता था | इस प्रकार निर्दयता से जीवन जीते हुए चुन्द सुकरिक ने पचपन वर्षो तक सुअरों की हत्या की |

निर्दयता का सिलसि ला यह था कि इन वर्षो में यधपि बोद्ध विहार के पास ही रहता था पर कभी भी वह बोद्ध विहार नहीं गया | एक कड़छुल के बराबर भी दान नहीं दिया | लगातार पापकर्म में लिप्त रहने के कारण वर्षो बाद उसका शरीर रोग ग्रस्त हो गया | उसका जीवन नरक के समान हो गया | वह घोर कष्ठ में जीवन जीने लगा | लोग उसे देखते तो आपस में चर्चा करते कि कितनी भयंकर स्थिती है | उसकी स्थिती देखकर देखने वाला भी आश्चर्य से भर जाता था | कहते है कि नरक का जीवन इतना भयावह होता है कि यह देखने वाले को भी त्रस्त कर देता है |

Scan10009

Leave a Comment