पुण्यात्मा इस लोक में भी सुख पाता हैं और उस लोक में भी

पुण्यात्मा इस लोक में भी सुख पाता हैं और उस लोक में भी

चुन्द सुकरिक की कथा

सुकरिक सूअर की बोली बोलता, सूअर की तरह अपने शरीर को घसीटता तथा घर के अंदर की चीजों तोड़-फोड़ देता | उसके घर के लोग उसका मुह बंद कर देते पर वह मुह खोल लेता था | उसकी चिल्लाहट इतनी तीव्र होती थी कि कभी-कभी पड़ोसियों का रात में सोना भी हराम हो जाता था | घर से बाहर निकलता तो घर वाले उसे जान से मारने की धमकी देते उप पर इसका कोई असर नही होता | अत: घर वालोँ ने उसे एक कमरे में बंद कर दिया और बाहर पहरेदार बिठा दिया कि वह बाहर नहीं निकल सके | अब वह विवश होकर कमरे में ही लोटता तथा चिल्लाता | आठवे दिन उसकी मृत्यु हो गई और वह नरक में जा गिरा |

घर के बाहर से जब भिक्षुगण गुजरते तो सोचते कि घर के अंदर कोई सूअर बोल रहा है | उन्होंने बुद्ध को बताया कि सुकरिक सात दिनों से लगातार सूअर मार रहा था | तब बुद्ध ने भिक्षुओ समझाते हुए बताया, “वह सात दिनों से कोई सूअर नहीं मार रहा था | लोट-पोट करता हुआ अब वह मर गया हैं तथा नरक में जा गिरा हैं |”

तब बुद्ध ने ये दोनों गाथाएँ कही |

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