हत्या कर भी क्षीणास्त्रव कैसे ?

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हत्या कर भी क्षीणास्त्रव कैसे ?

लकुटंक भद्दीय की कथा

“दो क्षत्रिय राजा है- शाश्वतवाद (आस्तिकता) तथा उच्छेदवाद (नास्तिकता) | हम सबों के ऊपर इन दोनों में से एक राजा राज्य करता रहता है | इन दोनों का ही शासन कष्ट दायक है | अत: बुद्धिमान व्यक्ति को चाहिए कि वह इन दोनों से उपर उठे | अपने अंदर दोनों ही प्रकार की शंकाओ का नाश कर दे और फिर मध्यम मार्ग अपना ले | जो ऐसा करेगा वह सभी प्रकार के दु:खो से ऊपर उठ जाएगा |”

“जहा राजा रहेंगा; उसके साथ उसके सिपाही भी होंगे | दास उसके साथ-साथ ही चलेंगे | ये दास है – अन्य सिद्धांत,अन्य दर्शन, सारे शास्त्र | जो इन दासों को मार देगा अर्थात सिद्धांत, दर्शन, और शास्त्रों से उपर उठ जाएगा वह निश्चय ही इन जंजीरों से मुक्त हो जाएगा |” ऐसा व्यक्ति फिर पांच बांघो को भी मार डालता है | ये पांच बाघ है : हमारी पांच इंद्रिया जिनके माध्यम से मनुष्य शरीर से जुड़ा हुआ होता है |

लकुटंक भद्दीय थेर देखने में तो छोटे कद के थे उर उन्होंने जीवन में यह सब कुछ कर लिया था | अत: वे अहर्त हो चुके थे | भिक्षुओं के समझ में बात आ गई |

तब शास्ता ने ये दो गाथाये कही |

 

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