जिसने पापो का किया दमन, वह हुआ श्रमण

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जिसने पापो का किया दमन, वह हुआ श्रमण

भिक्खु ह्त्थक की कथा

बात शास्ता के कानो तक पहुंची | उन्होंने ह्त्थक को बुला भेजा | ह्त्थक के आने पर उन्होंने उससे पूछा, “मैंने तुम्हारे विषय में इस प्रकार की बाते सुनी है | क्या तुम सचमुच ऐसा ही करते हुए घूम रहें हो ?” ह्त्थक ने स्वीकार किया | उसके स्वीकार कर लेने पर शाक्यमुनि ने उससे पूछा, “तुम ऐसा क्यों कर रहे हो ? एक मिथ्यावादी का मात्र सिर का मुण्डन कराकर श्रमण कहलाना लज्जाजनक है | जिस व्यक्ति ने अपने पापों को शांत कर दिया है, वस्तुत: वही श्रमण है |” ऐसाकहकर उन्होंने इन दोनों गाथाओ को कहा |

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