धर्ममार्ग पर न्यायी कौन है ?

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धर्ममार्ग पर न्यायी कौन है ?

न्यायाधीश की कथा

इस प्रकार उपदेश देते हुए बुद्ध ने ये गाथाये कही |

टिप्पणी : बौद्ध धर्म की रीढ़ है – “कर्म का सिधान्त” अर्थात हम जैसा बोयेंगे वैसा ही काटेंगे | कांटे बोयेंगे तो कांटे काटेंगे और फुल बोयेंगे तो फुल ही काटेंगे | यह प्रकृति का शाश्वत नियम रहा है, और सदैव रहेगा |

उसी प्रकार बुरे कर्म करने वाला अपने लिए बुरे फल का प्रबंध कर चूका है | अब यह मात्र समय की बात है कि वह फल आज ही काट ले या कल को काटे या परसों या फिर तरसो | संभव है इस जन्म में नहीं काटना पड़े पर उसका अर्थ यह नहीं कि उसे फल को काटने से मुक्ति मिल गई | मुक्ति नहीं मिली है; फल काटने का समय मात्र थोडा आगे बढ़ गया है | इस प्रकार गलत निर्णय देने वाले न्यायाधीश ने अपने लिए अपनी सजा आज ही सुनिश्चित कर ली है | उस निर्णय को मात्र सुरक्षित रखा गया है और जैसे ही उपयुक्त समय होगा, उस न्यायाधीश को उसके किए का फल सुना दिया जायेगा | अत: गलत निर्णय देकर इस कथा के सभी न्यायाधीशो ने अपने बचाव का पूरा अवसर गँवा दिया |

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