मार्ग एक ही है

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मार्ग एक ही है

पांच सौ भिक्षुओं की कथा

उनकी बातचीत और साधारण लोगों की बातचीत में कोई अंतर नहीं था | सांसारिक लोगों की तरह वे भी गप्पे मार रहें थे | वरन उनकी चर्चा का विषय है – सांसारिक चीजे, सारी की सारी चर्चा अंतयात्रा से सम्बन्धित न होकर अहिर्यात्रा से ही सम्बन्धित थी | निजी अनुभूति, अपनी-अपनी साधना उनकी चर्चा का विषय नहीं था, बल्कि विषय था- “अमुक गाँव की सडक अच्छी है, अमुक गाँव की सडक अच्छी नहीं है | वहा का रास्ता कंकड़ युक्त है, पथरीला है, दूसरी जगह के रास्ते पर कंकड़ भी नही है मार्ग पथरीला भी नहीं है |”

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