निर्वाण लाभ, सर्वश्रेष्ठ लाभ

निर्वाण लाभ, सर्वश्रेष्ठ लाभ गंगारोहण की कथा एक बार वैशाली में अभूतपूर्व अकाल पड़ा | वहा के नागरिक दाने-दाने को मोहताज हो गए | जो सबसे अधिक गरीब थे वे मौत की चपेट में पहले आ गए | उनके शव जहा-तहा पड़े रहें और उनमे आसक्त होकर भुत-प्रेत आ धमके | उन भुत-प्रेतों के आतंक … Read more

दुसरों को कष्ट देना : सबसे बड़ा पाप

दुसरों को कष्ट देना : सबसे बड़ा पाप मुर्गी के अंडे खाने वाले की कथा श्रावस्ती नगर के निकट पण्डुर नामक एक गाव था | जहा एक महिला रहती थी | उसे मुर्गी के अंडे बहुत अच्छे लगते थे | उसने एक मुर्गी पाल रखी थी | मुर्गी जब भी अंडे देती, वह अंडे खा … Read more

कर्म और अकर्म का भेद जानो

कर्म और अकर्म का भेद जानो भद्धियवासी भिक्षुओं की कथा शाक्य मुनि का वास भद्धियनगर में चल रहा था | यह घटना उसी समय की है | वहा के भिक्षु अपनी ध्यान-विपश्यना के असली काम को छोड़कर सांसारिक काम-जूते बनाने में लग गए थे | कुछ ने अन्य काम शुरू कर दिया था- जैसे पात्रों … Read more

अशुभ की स्मृति रखे, शुभ होता जायेंगा

अशुभ की स्मृति रखे, शुभ होता जायेंगा भद्दीयवासी भिक्षुओं की कथा महाकारुणिक सांसारिक भिक्षुओं को सही मार्ग पर लाना चाहते थे | अत: उन भिक्षुओं को बुलाया और उन्हें समझाया, “भिक्षुओं ! तुम भूल गए हो कि किस भावना और किस उद्देश से प्रव्रजित हुए थे | आज तुम क्या कर रहें हो ? तुम … Read more

माता, पिता और राजा-दास को कैसे मारे ?

माता, पिता और राजा-दास को कैसे मारे ? लकुटंक भद्दीय की कथा शाक्य मुनि जेतवन में विहरते थे | बहुत सारे आगन्तुक भिक्षु वहा पधारे | उन्हें सादर प्रणाम किया और एक ओर बैठ गए | उसी समय लकुटंक भद्दीय स्थविर नामक एक थेर शास्ता से बिदा ले थोड़ी दूर जा रहें थे | लकुटंक … Read more

हत्या कर भी क्षीणास्त्रव कैसे ?

हत्या कर भी क्षीणास्त्रव कैसे ? लकुटंक भद्दीय की कथा “दो क्षत्रिय राजा है- शाश्वतवाद (आस्तिकता) तथा उच्छेदवाद (नास्तिकता) | हम सबों के ऊपर इन दोनों में से एक राजा राज्य करता रहता है | इन दोनों का ही शासन कष्ट दायक है | अत: बुद्धिमान व्यक्ति को चाहिए कि वह इन दोनों से उपर … Read more

बुद्धानुस्मृति वाले शिष्य सदा प्रबुद्ध रहते है

बुद्धानुस्मृति वाले शिष्य सदा प्रबुद्ध रहते है दारूशाकटिक पुत्र की कथा यह घटना उस समय की है, जब शाक्य मुनि राजगृह में विध्यमान थे | नगर के दो लड़के, एक सम्यग्दृस्थी का पुत्र और दूसरा मिथ्यादृष्टी का पुत्र गलियों में सदैव गोलियों का खेल और अन्य खेल भी खेला करते थे | सम्यग्दृस्थी का पुत्र … Read more