धर्मास्मृति वाले शिष्य सदैव प्रबुद्ध रहते है

धर्मास्मृति वाले शिष्य सदैव प्रबुद्ध रहते है दारूशाकटिक पुत्र की कथा हारने वाले बालक ने जितने वाले बालक की मन:स्थिति को देखना शुरु किया | उसने पाया कि जितने वाला सदैव शांत चित्त रहता है, वह कभी बेचैन नहीं दिखाता है और न उसने उसमे जितने की प्रबल महत्वकांक्षा ही देखी | वह खेलता था … Read more

संघानुस्मृति वाले शिष्य सदैव प्रबुद्ध रहते है

संघानुस्मृति वाले शिष्य सदैव प्रबुद्ध रहते है दारूशाकटिक पुत्र की कथा सम्यगदृष्टी का पिता जंगल से लकड़िया काटकर लाता था और उसे बेचता था | अत: लोग उसे पिता के नाम के आधार पर ‘दारूशाकटिक पुत्र’ कहने लगे | एक दिन दारूशाकटिक पुत्र और उसके पिता दोनों वन में लकड़ी काटने गए | पिता-पुत्र लकडियों … Read more

कायगतास्मृति वाले शिष्य सदैव प्रबुद्ध रहते है

कायगतास्मृति वाले शिष्य सदैव प्रबुद्ध रहते है दारूशाकटिक पुत्र की कथा उधर उसका बेटा बैलगाड़ी पर बैठा पिता की प्रतीक्षा कर रहा था | पिता नगर के अंदर बंद था और उसका बेटा उधर श्मशान में अकेला | बेटा गाड़ी के निचे छिपकर सो गया | राजगृह में बहुत सारे भुर-पिशाच रहते थे और बेचारा … Read more

अहिंसास्मृति वाले शिष्य सदैव प्रबुद्ध रहते है

अहिंसास्मृति वाले शिष्य सदैव प्रबुद्ध रहते है दारूशाकटिक पुत्र की कथा तब सम्यगदृष्टी प्रेत ने मिथ्यादृष्टी प्रेत को समझाया, “हमने उस लड़के के साथ ऐसा व्यवहार करके साथ बहुत बड़ा अन्याय किया है | अब हमे इसका प्रायश्चित करना चाहिए |” ऐसा कहकर वे दोनों उसकी रक्षा में बैठ गए | मिथ्यादृष्टी ने सोचा, “बच्चे … Read more

नित्यभावनास्मृति वाले शिष्य सदैव प्रबुद्ध रहते है

नित्यभावनास्मृति वाले शिष्य सदैव प्रबुद्ध रहते है दारूशाकटिक पुत्र की कथा जब यह वार्तालाप चल रहा था तो उसी समय लड़के के माता-पिता वहा आ गए | राजा को सच्चाई का पता चल गया | तब वह माता-पिता और पुत्र तीनों को लेकर शाक्य मुनि के सम्मुख उपस्थित हुआ | उसने शास्ता से जिज्ञासा जाहिर … Read more

संसार के आवागमन से मुक्ति ले

संसार के आवागमन से मुक्ति ले वज्जिपुत्रक भिक्षु की कथा शाक्य मुनि उन दिनों वैशाली में विराजमान थे | पूर्णिमा का दिन था | कार्तिक का मास था | नगर में उत्सव का माहौल था | चारों ओर उत्सव आयोजित हो रहें थे | मधुर संगीत लहरी बह रही थी | लोग उसमे आनंद के … Read more

शीलवान की सर्वत्र पूजा होती है

शीलवान की सर्वत्र पूजा होती है चित्त गृहपति की कथा चित्त गृहपति अनागामी था | थेर सारिपुत्र से धर्म श्रवण करके उसने यह फल प्राप्त किया था | एक बार वह कई बैलगाड़ीयो में उपहार भरकर श्रावस्ती आया और उन्हें शाक्य-मुनि एव भिक्षुसंघ को दान में दे दिया | जब वह दान दे रहा था … Read more