आलसी प्रज्ञा के मार्ग को प्राप्त नहीं कर सकता

आलसी प्रज्ञा के मार्ग को प्राप्त नहीं कर सकता योगाभ्यासी तिस्स थेर की कथा जेतवन में एक समय बहुत सारे कुलपुत्र शास्ता से प्रव्रजित हुए | उनसे प्रव्रज्या ग्रहण कर ध्यान-साधना की विधि सिख जंगल की ओर तपस्या करने हेतु प्रस्थान कर गए | उनमे से सिर्फ तिस्स नाम का एक भिक्षु विहार में रह … Read more

प्रज्ञा की वृद्धी के लिए यत्न करे

प्रज्ञा की वृद्धी के लिए यत्न करे पोटील स्थविर की कथा जेतवन विहार में पोटील नामक एक स्थविर रहते थे | वे त्रिपिटक के ज्ञानी थे, प्रवचन तो देते थे पर स्वयं मार्ग फल प्राप्त नहीं किया था | शास्ता को ज्ञात था कि इनके अंदर अभी भी अहंकार समाप्त नहीं हुआ है | अत: … Read more

आसक्ति और कामना को काटो

आसक्ति और कामना को काटो वृद्ध भिक्षुओं की कथा जिन दिनों बुद्ध जेतवन में वास करते थे उन दिनों बहुत सारे वृद्ध पुरुष एक साथ प्रव्रजित हो गए | वे सभी अपने गृहस्थ आश्रम में अच्छे-अच्छे परिवारों में पैदा हुए थे तथा आपस में मित्र भी थे | वे सत्कार के फल से तथा तथागत … Read more

काम वासना के बंधन से मुक्त हो

काम वासना के बंधन से मुक्त हो वृद्ध भिक्षुओं की कथा उनके पूर्व जन्म की कथा कहते हुए शाक्य-मुनि ने उनका कथन सुनाया, “हम समुद्र को सुखाने का प्रयत्न कर रहें पर पर समुद्र को सुखाने में सफल नहीं हो रहें है | हमारी चोच थक गई और मुह भी सूखता जा रहा है | … Read more

शरद ॠतु के पुष्पों की तरह आसक्ति को काट डालो

शरद ॠतु के पुष्पों की तरह आसक्ति को काट डालो सुवर्णकार थेर की कथा सारिपुत्र का एक शिष्य स्वर्णकार कुल में पैदा हुआ था | वही से उसने प्रव्रज्या ग्रहण की | सारिपुत्र ने ध्यान विपश्यना के लिए रागविरोधी कर्म स्थान बताया | उस शिष्य ने तीन महीने तक प्रयत्न किया पर सासफल नहीं हो … Read more

सिर्फ मुर्ख ही विघ्न नहीं देखता

सिर्फ मुर्ख ही विघ्न नहीं देखता महाधनी व्यापारी की कथा एक उपासक वाराणसी से कुसुम और लाल रंग में रंगे हुए कपड़ो की गाड़िया लेकर व्यापार के लिए श्रावस्ती पहुचकर रुक गया कि “कल नहीं पार करूँगा |” रात में बड़ी तेज बारिश हुई और नदी में सात दिनों तक पानी लबालब भरा रहा | … Read more

आसक्त व्यक्ति : मृत्यु के अधीन

आसक्त व्यक्ति : मृत्यु के अधीन किसा गोतमी की कथा किसा गोतमी का प्रसंग पहले भी ‘धम्मपद’ के ‘सहस्त्रवर्ग’ (गाथा ११४) में आ चूका है | वहा शास्ता ने गोतमी को समझाते हुए कहा था, “अमृत स्थान (निर्वाण) को बिना देखे हुए सौ वर्षो तक जिन्दा रहना व्यर्थ है | उसके बजाय यदि कोई अमृत … Read more