कायगतास्मृति वाले शिष्य सदैव प्रबुद्ध रहते है

कायगतास्मृति वाले शिष्य सदैव प्रबुद्ध रहते है दारूशाकटिक पुत्र की कथा उधर उसका बेटा बैलगाड़ी पर बैठा पिता की प्रतीक्षा कर रहा था | पिता नगर के अंदर बंद था और उसका बेटा उधर श्मशान में अकेला | बेटा गाड़ी के निचे छिपकर सो गया | राजगृह में बहुत सारे भुर-पिशाच रहते थे और बेचारा … Read more

अहिंसास्मृति वाले शिष्य सदैव प्रबुद्ध रहते है

अहिंसास्मृति वाले शिष्य सदैव प्रबुद्ध रहते है दारूशाकटिक पुत्र की कथा तब सम्यगदृष्टी प्रेत ने मिथ्यादृष्टी प्रेत को समझाया, “हमने उस लड़के के साथ ऐसा व्यवहार करके साथ बहुत बड़ा अन्याय किया है | अब हमे इसका प्रायश्चित करना चाहिए |” ऐसा कहकर वे दोनों उसकी रक्षा में बैठ गए | मिथ्यादृष्टी ने सोचा, “बच्चे … Read more

नित्यभावनास्मृति वाले शिष्य सदैव प्रबुद्ध रहते है

नित्यभावनास्मृति वाले शिष्य सदैव प्रबुद्ध रहते है दारूशाकटिक पुत्र की कथा जब यह वार्तालाप चल रहा था तो उसी समय लड़के के माता-पिता वहा आ गए | राजा को सच्चाई का पता चल गया | तब वह माता-पिता और पुत्र तीनों को लेकर शाक्य मुनि के सम्मुख उपस्थित हुआ | उसने शास्ता से जिज्ञासा जाहिर … Read more

संसार के आवागमन से मुक्ति ले

संसार के आवागमन से मुक्ति ले वज्जिपुत्रक भिक्षु की कथा शाक्य मुनि उन दिनों वैशाली में विराजमान थे | पूर्णिमा का दिन था | कार्तिक का मास था | नगर में उत्सव का माहौल था | चारों ओर उत्सव आयोजित हो रहें थे | मधुर संगीत लहरी बह रही थी | लोग उसमे आनंद के … Read more

शीलवान की सर्वत्र पूजा होती है

शीलवान की सर्वत्र पूजा होती है चित्त गृहपति की कथा चित्त गृहपति अनागामी था | थेर सारिपुत्र से धर्म श्रवण करके उसने यह फल प्राप्त किया था | एक बार वह कई बैलगाड़ीयो में उपहार भरकर श्रावस्ती आया और उन्हें शाक्य-मुनि एव भिक्षुसंघ को दान में दे दिया | जब वह दान दे रहा था … Read more

सत्पुरुष दूर से ही दिखते है

सत्पुरुष दूर से ही दिखते है चूल सुभद्रा की कथा अनाथपिंडीक और उग्र सेठ बचपन के मित्र थे | साथ-साथ ही बड़े हुए | दोनों में प्रगाढ़ मित्रता थी यद्धपि अनाथपिंडीक बुद्ध का अनुयायी था और उग्र सेठ नंगे साधुओ का | उग्र सेठ को एक पुत्र हुआ, अनाथपिंडीक को एक पुत्री; चुल सुभद्रा नाम … Read more

आत्मसंयमी साधक तो अकेला ही चलेंगा

आत्मसंयमी साधक तो अकेला ही चलेंगा अकेले विहार करने वाले थेर के कथा शाक्य मुनि जेतवन ने विहरते थे | विहार में अनेक भिक्षु रहकर ध्यान-साधना का अभ्यास करते थे | वे आपस में मिलते-जुलते भी थे, धर्म-चर्या भी करते थे, लेकिन उनमे एक भिक्षु इनसे सर्वथा भिन्न था | वह दुसरे भिक्षुओं से मिलता-जुलता … Read more