काषाय वस्त्र का अधिकारी कौन ?

 काषाय वस्त्र का अधिकारी कौन ?  देवदत्त की कथा एक बार अग्रस्त्रावक सारिपुत्र तथा महामोग्लान अपने भिक्षुओं के साथ राजगृह में चारिका के लिए निकले | राजगृह वासी उन्हें दो, तिन या बड़े समूह में दान देने लगे | भंते सारिपुत्र ने उन्हें दान की महिमा समझाते हुए बताया , “ कोई व्यक्ति अगर स्वयं … Read more

कलह समाप्त करने का उपाय

कलह समाप्त करने का उपाय कौसाम्बी के भिक्षुओ की कथा एक बार कौसाम्बी में विनयधर और धर्म कथिक भिक्षुओ में विनय के एक छोटे से नियम को लेकर झगडा होने लगा | बुद्ध ने बहुत कोशिश की कि किसी प्रकार दोनों पक्षों में सुलह कराई जाए पर वे सुलह नहीं करा पाए | अत: उन्होंने … Read more

जो कमजोर (वृक्ष) है : मार (तूफान) उसे उखाड़ फेकेंगा

जो कमजोर (वृक्ष) है : मार (तूफान) उसे उखाड़ फेकेंगा महाकाल – चूल्लकाल की कथा बुद्धकाल की बात है | सेतव्य नगर में महाकाल, मध्यकाल तथा चूल्लकाल नामक तिन भाई व्यापार कर जीविका चलाते थे | बड़ा भाई महाकाल तथा छोटा भाई चूल्लकाल भिन्न भिन्न जगह व्यापार हेतु जाते तथा गाडियों में सामान लादकर लाते … Read more

मन ही सर्वेसर्वा है

मन ही सर्वेसर्वा है मट्ठकुण्डली की कथा मट्ठकुण्डली ब्राह्मण आदींपुमब्बक का पुत्र था | पिता बहुत ही कृपन था और कभी भी दान-पुण्य नहीं करता था | यहाँ तक कि जब उसे अपने पुत्र के लिए आभूषण बनाने की आवश्यकता पड़ी तो उसने उन आभूषणों को भी स्वयं ही बनाया ताकि स्वर्णकार को आभूषण बनानेकी … Read more

मन से बडा कुछ नही

चक्षुपाल की कथा यह गाथा बुद्ध ने श्रावस्ती के तेजवन विहार में चक्षुपाल नामक एक नेत्रहीन भिक्षु के संदर्भ में कही थी | एक दिन भिक्षु चक्षुपाल जेतवन विहार में बुद्ध को श्रद्धा सुमन अर्पित करने आया | रात्री में वह ध्यान साधना में लीन टहलता रहा | उसके पैरो के नीचे कई किडे – … Read more