बाहर से साफ, भीतर से गंदा : क्या लाभ ?

बाहर से साफ, भीतर से गंदा : क्या लाभ ? कुछ भिक्षुओं की कथा शास्ता ने ये दो गाथाए कुछ भिक्षुओं के संदर्भ में जेतवन में कही थी | एक बार कुछ श्रमण भिक्षु और कुछ श्रामनेर अपनी धर्मचर्या के क्रम में अपने उपाध्यायो के चीवर रंगने का कम कर रहें थे ऑफ़ उन्हें दूसरी … Read more

आंतरिक शुद्धी से ही सुंदरता बढ़ती है

आंतरिक शुद्धी से ही सुंदरता बढ़ती है कुछ भिक्षुओं की कथा       सिर्फ अपने प्रारंभ कर्म को ख़ुशी-ख़ुशी बर्दाश्त करना होगा जैसा थेर महामोग्गान ने अंतिम जन्म में किया था | जब जीवन इस स्थिति में पहुच जाता है तो फिर कर्म का चक्र एक ऐसे चक्र के रूप में परिणित हो जाता है जिसमे … Read more

सिर मुंडा लेने से कोई संन्यासी नहीं हो जाता

सिर मुंडा लेने से कोई संन्यासी नहीं हो जाता भिक्खु ह्त्थक की कथा इन दो गाथाओ को बुद्ध ने जेतवन विहार में ह्त्थक नामक भिक्षु को संबोधित कर कहा था | श्रावस्ती में ह्त्थक नाम का एक भिक्षु था | वह अक्सर वाद-विवाद में लगा रहता था और शास्त्रार्थ में अधिकांशत: पारजित हो जाता था … Read more

जिसने पापो का किया दमन, वह हुआ श्रमण

जिसने पापो का किया दमन, वह हुआ श्रमण भिक्खु ह्त्थक की कथा बात शास्ता के कानो तक पहुंची | उन्होंने ह्त्थक को बुला भेजा | ह्त्थक के आने पर उन्होंने उससे पूछा, “मैंने तुम्हारे विषय में इस प्रकार की बाते सुनी है | क्या तुम सचमुच ऐसा ही करते हुए घूम रहें हो ?” ह्त्थक … Read more

केवल भिक्षाटन मात्र से कोई भिक्षु नही हो जाता

केवल भिक्षाटन मात्र से कोई भिक्षु नही हो जाता एक ब्राह्मण की कथा इन दो गाथाओ को बुद्ध ने जेतवन में एक ब्राह्मण के संदर्भ में कहा था | वह ब्राह्मण संसार से संन्यास लेकर किसी अन्य सम्प्रदाय में प्रव्रजित हो गया | वह भिक्षाटन करता हुआ एक दिन विचार करने लगा, “बुद्ध अपने शिष्यों … Read more

सही भिक्षु कौन है ?

सही भिक्षु कौन है ? एक ब्राह्मण की कथा टिप्पणी : बौद्ध धर्म में बाह्य कर्म-कांडो को आडंबर की तरह देखा गया है | इसलिए उनका कोई महत्व नहीं है | वास्तव में महत्व की चीज है – आंतरिक रूपांतर | और आंतरिक रूपांतर के लिए बाह्य आडंबरो की कतई आवश्यकता नही | `     कहा … Read more

मौन रखने मात्र से कोई मुनि नहीं हो जाता

मौन रखने मात्र से कोई मुनि नहीं हो जाता तिर्थिको की कथा यह धर्म देशना बुद्ध ने जेतवन में किसी अन्य सम्प्रदाय के साधुओ के सम्बन्ध में कही थी | कथा है कि जब भी तीर्थिक किसी गृहस्थ के घर पर भोजन करते तो फिर उस गृहस्थ को भोजनोपरान्त आशीर्वाद देते हुए कहते थे, “तुम्हारे … Read more