मार्ग पर चल सांसारिक दु:खो से मुक्त हो

मार्ग पर चल सांसारिक दु:खो से मुक्त हो पांच सौ भिक्षुओं की कथा वहा की जमीन उबड़-खाबड़ है तो वहा जमीन समतल और उपजाऊ | उस रास्ते से जाने पर कांटे मिलेंगे पर फला तरफ जाने से रास्ते में कांटे नहीं मिलेंगे | उस तरफ छायादार वृक्ष है तो उस मार्ग पर कोई वृक्ष है … Read more

कठिन तप स्वयं ही करना होगा

कठिन तप स्वयं ही करना होगा पांच सौ भिक्षुओं की कथा शास्ता ने अपनी अंतदृष्टी से देख लिया कि भिक्षुओं में अह्र्त्व प्राप्ति की प्रबल संभावना है | अत: वे उन भिक्षुओं के निकट पहुँचे और आसन पर विराजमान होते हुए बोले, “तुम लोग अभी क्या चर्चा कर रहें थे ?” भिक्षुओं ने अपने मार्ग … Read more

सभी संस्कार अनित्य है

सभी संस्कार अनित्य है अनित्य-लक्षण की कथा शाक्य मुनि जेतवन में थे | उसी समय कुछ भिक्षु आये | वे उनसे ध्यान-साधना सीखकर साधना के उद्देश से वन को प्रस्थान कर गए | वे एकांत में साधना करते रहें | पर बहुत प्रयत्न करने पर भी उनकी कोई विशेष प्रगति नहीं हुई | उन्होंने सोचा … Read more

सारे संसार दुःखमय है

सारे संसार दुःखमय है दुःख लक्षण की कथा यह दूसरी गाथा भी जेतवन में उन्ही भिक्षुओं के संदर्भ में कही गई है | कुछ समय बाद एक दिन शाक्य मुनि ने अपनी अंतदृष्टी से देखा कि इन भिक्षुओं में दुःख लक्षण भावना है तो फिर उन्होंने भिक्षुओं को बुलाया और उनसे बोले, “भिक्षुओं ! सभी … Read more

सभी धर्म अनात्म है

सभी धर्म अनात्म है अनात्म लक्षण की कथा यह धर्मदेशना भी शास्ता ने उन्हें भिक्षुओं के संदर्भ में जेतवन में कही थी | एक दिन शाक्य-मुनि में उन्हें सम्बोधित करते हुए समझाया, “भिक्षुओ ! सभी धर्म (पंचस्कन्ध) अनास्त है | आत्मा नाम की कोई वस्तु नहीं है | न तो तुममे और न ही इन … Read more

आलसी प्रज्ञा के मार्ग को प्राप्त नहीं कर सकता

आलसी प्रज्ञा के मार्ग को प्राप्त नहीं कर सकता योगाभ्यासी तिस्स थेर की कथा जेतवन में एक समय बहुत सारे कुलपुत्र शास्ता से प्रव्रजित हुए | उनसे प्रव्रज्या ग्रहण कर ध्यान-साधना की विधि सिख जंगल की ओर तपस्या करने हेतु प्रस्थान कर गए | उनमे से सिर्फ तिस्स नाम का एक भिक्षु विहार में रह … Read more

मन वचन और शरीर को शुद्ध करे

मन वचन और शरीर को शुद्ध करे शूकर प्रेत की कथा एक बार महामोग्गलान और लक्ष्मण थेर गृधकूट पर्वत से निचे उतर रहें थे | महामोग्गलान मुस्कुराये तो लक्ष्मण थेर ने इसका कारण पूछा | उन्होंने कहा कि विहार चलकर शास्ता के सामने यह प्रश्न पूछना | दोनों विहार पहुंचे | शाक्य मुनि की उपस्थिति … Read more