आंतरिक शुद्धी से ही सुंदरता बढ़ती है

आंतरिक शुद्धी से ही सुंदरता बढ़ती है कुछ भिक्षुओं की कथा       सिर्फ अपने प्रारंभ कर्म को ख़ुशी-ख़ुशी बर्दाश्त करना होगा जैसा थेर महामोग्गान ने अंतिम जन्म में किया था | जब जीवन इस स्थिति में पहुच जाता है तो फिर कर्म का चक्र एक ऐसे चक्र के रूप में परिणित हो जाता है जिसमे … Read more