पापी सर्वत्र दु:ख ही पायेगा

पापी सर्वत्र दु:ख ही पायेगा देवदत्त की कथा यह कहानी श्रावस्ती के जेतवन विहार की है | देवदत्त तथागत का ममेरा भाई था | हालाकी वह उनके संघ में भिक्षु था पर वह भीतर ही भीतर उनसे जलता था और बदला लेना चाहता था | उसने तीन बार बुद्ध की हत्या करनी चाही पर वह … Read more

देवदत्त, तुम्हारे ऊपर यह काषाय नहीं शोभता

देवदत्त, तुम्हारे ऊपर यह काषाय नहीं शोभता देवदत्त की कथा आम जनता ने देवदत्त को वह वस्त्र धारण किए देखा I वे अपने आपको रोक नहीं सके और आपस में कहने लगे, “ यह वस्त्र देवदत्त के उपर शोभा नहीं देता I इसके सही पात्र तो भंते सारिपुत्र लगते है I” बुद्ध उन दिनों श्रावस्ती … Read more

काषाय वस्त्र का अधिकारी कौन ?

 काषाय वस्त्र का अधिकारी कौन ?  देवदत्त की कथा एक बार अग्रस्त्रावक सारिपुत्र तथा महामोग्लान अपने भिक्षुओं के साथ राजगृह में चारिका के लिए निकले | राजगृह वासी उन्हें दो, तिन या बड़े समूह में दान देने लगे | भंते सारिपुत्र ने उन्हें दान की महिमा समझाते हुए बताया , “ कोई व्यक्ति अगर स्वयं … Read more