बुद्धानुस्मृति वाले शिष्य सदा प्रबुद्ध रहते है

बुद्धानुस्मृति वाले शिष्य सदा प्रबुद्ध रहते है दारूशाकटिक पुत्र की कथा यह घटना उस समय की है, जब शाक्य मुनि राजगृह में विध्यमान थे | नगर के दो लड़के, एक सम्यग्दृस्थी का पुत्र और दूसरा मिथ्यादृष्टी का पुत्र गलियों में सदैव गोलियों का खेल और अन्य खेल भी खेला करते थे | सम्यग्दृस्थी का पुत्र … Read more