मन ही सर्वेसर्वा है

मन ही सर्वेसर्वा है मट्ठकुण्डली की कथा मट्ठकुण्डली ब्राह्मण आदींपुमब्बक का पुत्र था | पिता बहुत ही कृपन था और कभी भी दान-पुण्य नहीं करता था | यहाँ तक कि जब उसे अपने पुत्र के लिए आभूषण बनाने की आवश्यकता पड़ी तो उसने उन आभूषणों को भी स्वयं ही बनाया ताकि स्वर्णकार को आभूषण बनानेकी … Read more